शून्य से शिखर तक...
दो नौजवान एक ही मुद्दे पर
बड़ी देर से उलझे हुए थे, कोई हार मानने या अपनी बात का वजन कम करने को तैयार नहीं
था। इक्कीसवीं सदी अपने अंतिम पड़ाव पर थी, लोग चांद पर अपने घर बनाने लगे थे। तब हमारा
देश भी पीछे कैसे रहता। यहां के अनेक घरानों ने अंतरिक्ष से गुजरकर चंद्रमा पर प्लॉट
काटने शुरू कर दिए। गोया कि मानव सभ्यता चन्द्रयुग में थी, तो ऐसे विकसित दौर में बहस
चल रही थी। मुद्दा सनातन था 'महंगाईÓ और बात अटकी थी 'प्याजÓ पर। एक बंदे का कहना था मेरे
पुरखे दोनों वक्त रोटी के साथ प्याज खाते थे। इतना ही नहीं, कभी-कभार तो प्याज की सब्जी
तक बन जाया करती थी, लेकिन दूसरे बंदे को यह बात हजम नहीं हो पा रही थी। उसका मानना
था कि हो सकता है 'प्याज युगÓ में
हफ्ते में एकाध बार प्याज का अर्क सूंघने को मिल जाता हो। मगर यह तो मुश्किल ही नहीं
एकदम नामुमकिन है कि कोई दोनों टाइम प्याज अपने खाने के साथ खाए। इतना ही नहीं, एक
अन्य नौजवान ने बीच में बात काटते हुए साफ-साफ कहा कि हमारी तो गच्ची पर प्याज पड़ा
सूखता रहता था,जब मर्जी हुई, सटक लिया। नौजवानों की उस महफिल में यह सुन सब भौचक्क
रह गए। उन्हें सहसा विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि ऐसा कुछ हो सकता है। फिर एक बोला
भैया इतनी भी मत फेंको, कुछ तो रहम करो। तो क्या वाकई ऐसा हो जाएगा जनजीवन की कई जरूरी
चीजें आने वाले दौर में आम आदमी के लिए एकदम दुर्लभ हो जाएंगी। सच में यह सोचने वाली
बात है। मौजूदा हालात को देखते हुए कुछ भी असंभव नहीं। बीच में कुछ दिन के लिए प्याज
ने कुछ कृपा की थी। 30-40 रुपए किलो तक आ गया था। अलबत्ता कई जगह 60 रुपए किलो तक बिक
रहा था, फिर भी मन मसोसकर लोग अपनी जेब कटवा रहे थे। 4 दिन पहले पेट्रोल के दाम बढ़े
हैं और दूसरे दिन से प्याज का पारा चढ़ जाता है, वह कहता है - देखता हूं पेट्रोल का
बच्चा कैसे आगे निकलता है। कमबख्त सेव टमाटर तक को तो मैं पीछे छोड़ चुका हूं, इस पेट्रोल
की औकात ही क्या। बहरहाल, प्याज करीब-करीब पेट्रोल से आगे बढ़ गया। सरकार यह सब देख
रही है बड़े प्रेम से, क्योंकि प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि महंगाई से अभी
राहत मिलने वाली नहीं। सरकार न तो महंगाई पर लगाम लगा पा रही है और न मुनाफाखोरों की
खबर ले पा रही। जाहिर है, सब कुछ सुनियोजित है। हालत यह है कि अगस्त में महंगाई दर
बढ़कर 18.18 फीसदी पहुंच गई है, जबकि जुलाई में यह दर 11.91 फीसदी थी। नतीजे में अब
थोक महंगाई दर छह महीने के सबसे ऊंचे पायदान पर है। कोई सोच भी सकता था कि एक दिन प्याज
इस कदर रुलाएगा?
जब था दस पैसे किलो.
इस सिलसिले में कोई भी जिम्मेदार
हस्ती निश्चित तौर पर कुछ भी टिप्पणी करने, मतलब दाम कब घटेंगे, आखिर बढ़े तो बढ़े
कैसे आदि सवालों से कतराते हैं। यहां तक कि कृषि मंत्री शरद पवार भी सचाई से मुंह मोड़
बेतुके बयान देते नजर आ रहे हैं। वे कहते हैं कि किसान जब फायदा उठा रहा है तो चिल्ला-चोट
हो रही है। जब प्याज 10 पैसे किलो था और सड़ जाता था तब हंगामा नहीं होता था, मगर लोगों
की तो यही सोच-सोचकर दिमाग की नसें जवाब देने लगी हैं कि आखिर... शून्य से शिखर तक
पहुंचा कैसे यह निष्ठुर प्याज? कहां दो रुपए में पांच किलो और कहां 80 रुपए में एक
किलो।
भारत
सक्सेना
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